By: Bhopalmahanagar
11-03-2019 07:01

नई दिल्ली: कभी मैसोपोटामिया की सभ्यता का प्रतीक रहा इराक आज एक युद्ध में उलझे देश के तौर पर जाना जाता है. शुरू से ही सभ्यताओं का उद्गम स्थल रहा इराक आज पिछले कई सालों से आंतरिक सशस्त्र संघर्ष में उलझा हुआ है. 2017 में दुनिया के चौथा सबसे ज्यादा कच्चा तेल देने वाले पश्चिम एशिया के इस देश को अब भी शांति का इंतजार है. इराक का अधिकारिक नाम रिपब्लिक ऑफ ईराक है. अकूत तेल भंडार होने के बाद भी इराक अपेक्षाकृत उन्नति नहीं कर सका. यहां का समृद्ध इतिहास का कारण इस क्षेत्र की बड़ा उपजाऊ मैदान है. 

भौगोलिक स्थिति
राजनैतिक रूप से इराक पूर्व में ईरान, उत्तर में तुर्की, पश्चिम में सीरिया, दक्षिण पश्चिम में जॉर्डन, दक्षिण में सउदी अरब, दक्षिणपूर्व में कुवैत से घिरा है. इसके अलावा दक्षिण पूर्व की सीमा का कुछ हिस्सा (लगभग 58 किलोमीटर) फारस की खाड़ी को छूता है. यहां का सबसे बड़ा इलाका दजला (टिगरिस) और फरात नदी का क्षेत्र है जो इसे पूरे अरब संसार का सबसे बड़ा उपजाऊ मैदान बनाता है. उत्तर पूर्व में तुर्की और ईरान की सीमा से लगी जागरोस पर्वत श्रंखला है. दजला और फरात नदी का मैदान उत्तर से दक्षिण पश्चिम की ओर जाता है जहां इस क्षेत्र का सबसे उपजाऊ क्षेत्र आता है. दक्षिण पश्चिम में सीरीयाई रेगिस्तान का इलाका है. 

आज का इराक 437,072 वर्ग किलोमीटर (168,754 वर्ग मील) में फैला है. राजधानी बगदाद यहां का सबसे बड़ा शहर है. सुन्नी मुस्लिम बहुल लोग होने के बावजूद यहां कई प्रजाति के लोग रहते हैं जिनमें अरब, कुर्द, असीरियाई, तुर्क, शाबिकी, याजिदी, अर्मेनियाई, आदि शामिल हैं. 95 प्रतिशत से ज्यादा लोग यहां मुस्लिम हैं, बाकी लोगों में ईसाई और अन्य मूल के लोगों की बसाहट है. यहां की अधिकारिक भाषा अरबी और कुर्दिश है.

संक्षिप्त इतिहास
इस क्षेत्र में प्रागैतिहासिक काल के अवशेष नवपाषाण युग के पाए गए हैं. कई पाए गए प्रमाणों के मुताबिक सबसे पहले मानव यहीं बसा था. हालांकि इस बात से बहुत से वैज्ञानिक सहमत नहीं हो पाए हैं. लगभग 5000 ईसापूर्व से सुमेरिया की सभ्यता के बाद यहां बेबीलोनिया, असीरिया तथा अक्कद साम्राज्यों का प्रभाव आया. इसी दौरान दुनिया में सबसे पहले लिखने की शुरुआत भी यहीं से ही हुई. इतना ही नहीं, यहीं विज्ञान, गणित और अन्य विधाएं भी फली फूलीं. ईसा पूर्व छठी सदी में यहां फारस के हखामनी सभ्यता का प्रभुत्व रहा. इसके बाद यहां मिदियों और असीरियाइयों ने राज किया. तीसरी सदी ईसापूर्व में सिकंदर के आगमन के समय यहां यवनों और उसके बाद रोमन साम्राज्य का आंशिक प्रभाव भी रहा, लेकिन उस समय तक यह इलाका पार्थियनों के कब्जे में आ चुका था. इसके बाद सासानियों ने यहां सातवीं सदी तक शासन किया. 
 

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