By: Bhopalmahanagar
09-04-2019 09:08

राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा है, अंत्योदय दर्शन है और सुशासन मंत्र है, इन शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा का संकल्प पत्र देश के सामने पेश किया।  2014 में बहुमत हासिल करने वाली भाजपा इस बार किन वादों को अपने घोषणापत्र में शामिल करती है, यह जानने की उत्सुकता थी। और अनुमान के मुताबिक पूरी नाटकीयता के साथ भाजपा का घोषणापत्र यानी 75 संकल्पों वाला संकल्प पत्र पार्टी के बड़े नेताओं ने पेश किया। 2014 की तरह इस बार भी बड़ी-बड़ी बातें इस संकल्प पत्र में समाहित हैं।

फर्क यही है कि तब मुखपृष्ठ पर अटल-आडवाणी-जोशी थे और उनके नीचे नरेन्द्र मोदी अपने सिपहसालारों यानी अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, शिवराज सिंह चौहान, डा.रमन सिंह, वसुंधरा राजे और मनोहर पर्रीकर के साथ थे। मनोहर पर्रीकर तो अब इस दुनिया में रहे नहीं और राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ की सत्ता भी चली गई है। इसलिए यहां के पूर्व मुख्यमंत्रियों को संकल्प पत्र में जगह नहीं मिली। अटलजी का निधन हो चुका है और श्री आडवाणी व श्री जोशी को मार्गदर्शक मंडल में भेजने के बाद अब राजनैतिक संन्यास पर भाजपा ने भेज दिया है। बिछड़े सभी बारी-बारी। इस तरह संकल्प पत्र के मुखपृष्ठ पर अकेले नजर आ रहे हैं नरेन्द्र मोदी। और साथ ही यह भी नजर आ रहा है कि 2019 का चुनाव भाजपा अपने काम की जगह मोदीजी के नाम पर लड़ रही है।

मोदीजी ने कहा कि वन मिशन, वन डायरेक्शन को लेकर आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है, लेकिन फिलहाल यही लगता है कि भाजपा का लक्ष्य वन मैन आर्मी को लेकर आगे बढ़नेे का है और किस डायरेक्शन में बढ़ना है, यह भी संकल्प पत्र में नजर आ रहा है। भाजपा ने एक बार फिर राम मंदिर को घोषणापत्र में स्थान दिया है और कहा है कि संविधान के दायरे में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी संभावनाओं की तलाश की जाएगी। इस बार राममंदिर के साथ सबरीमला मंदिर का भी जिक्र है। कहा गया है कि सबरीमला मंदिर जैसे मामलों में आस्था और विश्वास के विषयों को संवैधानिक संरक्षण दिया जाएगा। अब यह सोचने की बात है कि आस्था और संविधान एक ही तराजू पर कैसे तौले जा सकते हैं? संविधान सबके लिए एक है और आस्था सबकी अलग-अलग। फिर जो बात सबरीमला के लिए लागू करने की कोशिश होगी, क्या राममंदिर पर भी वही लागू नहींकी जाएगी?

जम्मू-कश्मीर मामले में भाजपा अपने पुराने रुख पर कायम है, यह एक बार फिर नजर आया, यानी धारा 370 और धारा 35 ए को लेकर वही घिसा-पिटा वादा दोहराया गया है, जिसका एकमात्र मकसद हकीकत और इतिहास को भुलाकर भावनाओं का दोहन करना है। पुलवामा और बालाकोट की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ बड़ी बातें न हों, यह हो नहीं सकता। भाजपा ने एक बार फिर आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की बात कही है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, राष्ट्रीय व्यापार आयोग की स्थापना, छोटे दुकानदारों को पेंशन, प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1: 400 करने का प्रयास जैसी घोषणाओं के अलावा समान नागरिक संहिता, तीन तलाक खत्म करना, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण और गंगा सफाई जैसे स्थाई वादे भी भाजपा के संकल्प पत्र का हिस्सा हैं। 

भाजपा ने घोषणा की है कि भारत साल 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर और साल 2032 तक 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा। यानी एक बार फिर दूर का ख्वाब जनता को दिखाया जा रहा है, ताकि नजदीक की खामियों पर नजर न जाए। 2032 तक तो गंगा-जमुना में न जाने कितना पानी बह जाएगा, लेकिन क्या 10 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था के ख्वााब में बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक गैर बराबरी जैसे सवालों का जवाब मिल पाएगा? भाजपा के घोषणापत्र में इस बार काले धन की वापसी, हर खाते में 15 लाख, 2 करोड़ रोजगार जैसी बातें नहीं हैं, न अच्छे दिन आएंगे जैसी कोई लाइन है। मतलब साफ है कि भाजपा ने पांच साल पहले जो वादे किए थे, वे जुमले ही साबित हुए। अब नए-पुराने 75 संकल्प हैं, जिन्हें निभाने का मौका जनता भाजपा को देती है या नहीं, ये मई में पता चल जाएगा। 
 

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