By: Bhopalmahanagar
12-04-2019 08:44

इंदौर। मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ ने आयकर छापे की कार्रवाई के बाद विभाग के क्षेत्राधिकार पर ही सवाल उठा दिया है। पांच दिन पहले विभाग ने कक्कड़ के स्कीम 74 स्थित निवास पर छापामार कार्रवाई की थी। इसे अवैध घोषित करने की मांग करते हुए कक्कड़ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

गुरुवार को सीनियर एडवोकेट और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से बहस की। चार घंटे से ज्यादा चली बहस में सिब्बल ने क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रिंसिपल डायरेक्टर ऑफ इनकम टैक्स (इंवेस्टीगेशन) ने किस अधिकार से इंदौर में छापामार कार्रवाई की थी। आयकर विभाग के वकील ने इस पर कहा कि 2014 के नोटिफिकेशन के अनुसार प्रिंसिपल डायरेक्टर (इंवेस्टीगेशन) दिल्ली को पूरे देश में कार्रवाई का अधिकार है। सुबह 11.20 बजे शुरू हुई बहस शाम सवा चार बजे तक चली। याचिकाकर्ता ने याचिका में संशोधन प्रस्तुत करने के लिए सोमवार तक का समय ले लिया।

गुरुवार सुबह ठीक 10.40 बजे सीनियर एडवोकेट सिब्बल हाई कोर्ट पहुंचे। वे सीधे कोर्ट रूम नंबर 2 में पहुंचे। यहां जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव सिंगल बेंच में सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल कोर्ट रूम की पहली कतार में एडवोकेट के लिए लगी कुर्सी पर जाकर बैठ गए। उनके पास सीनियर एडवोकेट आनंद मोहन माथुर और सुनील जैन बैठे हुए थे। सुबह 11.20 बजे जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस विवेक रूसिया की डिविजनल बेंच ने कक्कड़ की याचिका पर सुनवाई शुरू की। बहस शुरू करते हुए सिब्बल ने सवाल उठाया कि दिल्ली आयकर विभाग बिना किसी अधिकार के इंदौर में कार्रवाई कैसे कर सकता है? क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर की गई छापामार कार्रवाई को अवैध घोषित किया जाए। उन्होंने आयकर विभाग की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि कक्कड़ मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी हैं। उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने की दुर्भावना के साथ कार्रवाई की है।

कार्रवाई की वजह से कक्कड़ की निजता का भी हनन हुआ। प्रिंसिपल डायरेक्टर (इंवेस्टीगेशन) न्यू दिल्ली को अधिकार नहीं है कि वह मप्र में किसी के यहां छापामार कार्रवाई करें। कार्रवाई के दौरान सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे। मप्र पुलिस से सहायता तक नहीं मांगी गई। दोपहर करीब पौने एक बजे तक सिब्बल बहस करते रहे।

इसके बाद आयकर विभाग की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय कुमार जैन ने बहस शुरू की। उन्होंने सिब्बल द्वारा उठाए सवालों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सितंबर 2014 में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार आयकर विभाग को पूरे देश में कार्रवाई का अधिकार है। याचिकाकर्ता मप्र के पूर्व पुलिस अधिकारी रहे हैं। इसलिए मप्र पुलिस की मदद लेने के बजाय सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था।

विजयवर्गीय को प्रेस नोट जारी होने से पहले कैसे पता चला

बहस के दौरान सिब्बल ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम लेकर कहा कि आयकर विभाग द्वारा कार्रवाई के संबंध में प्रेस नोट जारी करने से पहले ही विजयवर्गीय को पता चल गया था कि प्रेस नोट में क्या है? उन्होंने इस संबंध में ट्वीट भी किया था। हालांकि विभाग के वकील ने इसका विरोध करते हुए जवाब दिया कि विभाग की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित नहीं थी। कोई राजनेता क्या कहता है, इससे विभाग को कोई मतलब नहीं होता। विभाग के अधिकारी कभी मीडिया को कोई जानकारी नहीं देते। मीडिया में खबरें कैसे आईं, यह उन्हें नहीं पता।

सिब्बल के सवाल

-दिल्ली आयकर विभाग ने किस अधिकार से इंदौर में छापामार कार्रवाई की। ऐसे तो फिर कोई भी अधिकारी किसी भी दूसरे अधिकारी के क्षेत्राधिकार में जाकर कार्रवाई करने लगेगा।

-कार्रवाई के दौरान कक्कड़ के निवास पर मप्र पुलिस के बजाय सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई। प्रदेश शासन को कार्रवाई की जानकारी भी नहीं दी गई।

-कार्रवाई के दौरान कक्कड़ की निजता का हनन हुआ। इससे आम आदमी को उनकी आर्थिक स्थिति की जानकारी मिली जबकि कार्रवाई के दौरान विभाग को कोई काली कमाई मिली ही नहीं।

-राजनीतिक दुर्भाव से प्रेरित होकर कार्रवाई की गई थी। कक्कड़ मुख्यमंत्री के ओएसडी हैं, इसलिए उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया गया।

जैन के जवाब

-2014 में जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक डायरेक्टर इंवेस्टीगेशन दिल्ली को पूरे देश में कहीं भी कार्रवाई करने का अधिकार है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है

-सीआरपीएफ भी पुलिस ही है। कक्कड़ मप्र पुलिस के पूर्व अधिकारी हैं। इसलिए कार्रवाई के दौरान मप्र पुलिस के बजाय सीआरपीएफ को तैनात किया गया था।

-कार्रवाई से किसी की निजता प्रभावित नहीं हुई है। कार्रवाई के बाद विभाग ने प्रेस नोट जरूर जारी किया लेकिन इसमें कक्कड़ का नाम नहीं है। विभाग ने कभी मीडिया से बात नहीं की। कार्रवाई के दौरान जो कुछ भी मिला, उसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है।

-कार्रवाई राजनीति के प्रेरित नहीं है। याचिका में भी कक्कड़ ने किसी राजनीतिक दल को पक्षकार नहीं बनाया है।
 

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